Ganga Water Level: पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है. पिछले एक सप्ताह से गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, हालांकि शनिवार को इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई. इसके बावजूद प्रशासन ने राहत की सांस नहीं ली है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. हरिद्वार और बिजनौर बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के किनारे बसे कई गांवों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है.
हरिद्वार और बिजनौर बैराज से छोड़ा गया 2.35 लाख क्यूसेक पानी
प्रशासन के अनुसार, शनिवार को हरिद्वार और बिजनौर बैराज से दोपहर तक कुल 2 लाख 35 हजार 986 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. शनिवार सुबह करीब 1 लाख 5 हजार 920 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि दोपहर 2 बजे तक इसमें और बढ़ोतरी करते हुए 1 लाख 32 हजार 66 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. लगातार छोड़े जा रहे पानी की वजह से गंगा के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है.
इन गांवों में सबसे ज्यादा बाढ़ का खतरा
गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में गंगा खादर के किनारे बसे कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. इनमें नयागांव इनायतपुर, अब्दुलापुर, कोथला, रामपुर न्यामतपुर, आलमगीरपुर, मोहम्मदपुर शाकरपुर, लठीरा, कृष्णावाली मंढैया, नयाबांस बख्तावरपुर, आलमपुर भगवंतपुर, एदलपुर प्रसादीपुर, गांवड़ी, कुतुबपुर, जमालपुर, खानपुर-माखनपुर, सैदपुर, मुकीमपुर, झड़ीना, चितौड़ा, मोहम्मदपुर रूस्तमपुर और सलाहाबाद जैसे गांव शामिल हैं.
पिछले साल टूटा था 12 साल पुराना रिकॉर्ड
पिछले वर्ष गंगा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया था कि उसने करीब 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. उस दौरान कई गांवों के खेतों, जंगलों और गलियों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था. कई स्थानों पर गंगा नदी गांवों के बेहद करीब पहुंच गई थी, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. हालात ऐसे बन गए थे कि कई ग्रामीणों को गांव से बाहर निकलने के लिए नाव और ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा था.
येलो अलर्ट स्तर की ओर बढ़ रही गंगा
इस वर्ष भी गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है और अब यह येलो अलर्ट स्तर की ओर बढ़ने लगा है. पिछले एक सप्ताह से हरिद्वार और बिजनौर बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया, “शनिवार को गंगा के जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की गिरावट आई है.” उन्होंने बताया, “गंगा के जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाई हुई है.”
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