Anulom Vilom Pranayam: बारिश में सर्दी-खांसी से परेशान हैं? अनुलोम-विलोम से मिल सकती है राहत, जानें क्या कहता है आयुष मंत्रालय

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Anulom Vilom Pranayam: बारिश और बदलते मौसम में सर्दी-खांसी की समस्या आम हो जाती है. कई बार खांसी लगातार बनी रहने से काफी परेशानी होती है. ऐसे में लोग राहत के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं. हालांकि, आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम का नियमित अभ्यास खांसी से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने में मदद कर सकता है. इसके साथ ही यह एकाग्रता बढ़ाने और तनाव व चिंता को कम करने में भी सहायक हो सकता है.

खांसी में राहत दिलाने में मदद कर सकता है अनुलोम-विलोम

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम खांसी से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने में मदद कर सकता है. मंत्रालय का कहना है कि नियमित अभ्यास से एकाग्रता और ऊर्जा बढ़ाने में मदद मिलती है. साथ ही यह तनाव और चिंता के स्तर को कम करने में भी सहायक हो सकता है. अनुलोम-विलोम का अभ्यास करते समय कुछ समय गहरी सांस लेने और सांस लेने की गति को धीमा रखने पर ध्यान देना चाहिए. इस प्राणायाम में बारी-बारी से दोनों नथुनों से सांस ली और छोड़ी जाती है.

बदलते मौसम में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बीते दिन आयुष मंत्रालय की ओर से बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों को नजरअंदाज नहीं करने की चेतावनी दी गई थी. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि मौसम में बदलाव का स्वास्थ्य पर अनपेक्षित असर पड़ सकता है. ऐसे चेतावनी वाले संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिनमें तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत हो सकती है. आयुष मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर बताया गया था कि तेज बुखार के साथ उलझन, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में पानी की भारी कमी या लगातार उल्टी जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. ऐसी स्थिति में बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर मेडिकल मदद मिलने से गंभीर समस्याओं से बचने और जान बचाने में भी मदद मिल सकती है.

स्वस्थ हृदय के लिए इन चीजों पर दें ध्यान

आयुष मंत्रालय की ओर से स्वस्थ हृदय को लेकर भी जानकारी साझा की गई थी. सोशल मीडिया पोस्ट में बताया गया था कि एक स्वस्थ और अधिक संतुलित जीवन की कुंजी अपने स्वास्थ्य के जरूरी पहलुओं के प्रति जागरूक रहना है. मंत्रालय के अनुसार, ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज, ब्लड लिपिड और शरीर के वजन के प्रति सचेत रहने से हृदय संबंधी जोखिम कारकों को जल्दी पहचानने में मदद मिल सकती है. जागरूकता, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े विकल्पों के जरिए हृदय स्वास्थ्य की दिशा में सक्रिय कदम उठाए जा सकते हैं.

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