Bhujangasan Benefits: आजकल दफ्तरों में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. लंबे समय तक एक ही पॉजिशन में बैठे रहने का सीधा असर शरीर पर पड़ता है. खासकर रीढ़ की हड्डी में अकड़न, कमजोरी और पीठ दर्द जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं. ऐसे में शरीर को एक्टिव और लचीला बनाए रखने के लिए योग काफी मददगार हो सकता है. भुजंगासन भी ऐसा ही योगासन है, जिसका नियमित अभ्यास रीढ़ की हड्डी के साथ शरीर के कई हिस्सों के लिए फायदेमंद माना जाता है.
क्या है भुजंगासन?
भुजंगासन को अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है. इस आसन को करते समय शरीर का ऊपरी हिस्सा फन फैलाए हुए सांप की तरह दिखाई देता है. यही वजह है कि इसे भुजंगासन नाम दिया गया है. यह सिर्फ रीढ़ की हड्डी को स्ट्रेच करने वाला आसन नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ता है. इसके अभ्यास से शरीर में खिंचाव आता है और मांसपेशियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है. साथ ही यह शरीर को ऊर्जावान रखने और मन को शांत करने में भी सहायक माना जाता है.
रीढ़ की हड्डी को बनाता है मजबूत और लचीला
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन पेट के बल लेटकर किया जाने वाला प्रमुख योगासन है. इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में मदद मिलती है. लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए रीढ़ की हड्डी में होने वाली अकड़न और पीठ से जुड़ी परेशानी काफी आम है. ऐसे में भुजंगासन पीठ की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने और पीठ दर्द से राहत देने में सहायक हो सकता है.
पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद
भुजंगासन का असर केवल पीठ तक सीमित नहीं रहता. यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसके अभ्यास से पेट के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर असर
इस योगासन के दौरान छाती का विस्तार होता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन श्वसन तंत्र को मजबूत करने में सहायक है और सांस से जुड़ी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.
किडनी और शरीर पर भी पड़ता है असर
भुजंगासन के नियमित अभ्यास से किडनी पर भी प्रभाव पड़ता है. इससे किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलने की बात कही गई है. इसके अलावा यह आसन छाती, कंधों और पेट की मांसपेशियों को अच्छी तरह स्ट्रेच करता है. इससे शरीर में खिंचाव आता है और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में मदद मिलती है.
तनाव और थकान कम करने में मददगार
भुजंगासन का फायदा सिर्फ शारीरिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी मिल सकता है. इसका नियमित अभ्यास मानसिक तनाव और थकान को कम करने में सहायक माना जाता है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से मन को शांत रखने और शरीर में फुर्ती बनाए रखने में मदद मिलती है. यही वजह है कि इसे शरीर और मन दोनों के लिए उपयोगी योगासन माना जाता है.
कैसे करें भुजंगासन?
भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधे लेट जाएं. दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें और शरीर को आराम की स्थिति में रखें. अब दोनों हाथों को धीरे-धीरे छाती के पास लाएं और हथेलियों को जमीन पर टिकाएं. इसके बाद गहरी सांस लेते हुए नाभि वाले हिस्से को ऊपर उठाएं. सिर को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएं और नजरों को ऊपर छत या आसमान की तरफ रखें.
इस दौरान आपकी पीठ धीरे-धीरे ऊपर की ओर मुड़ेगी और शरीर एक्सटेंशन पोजीशन में आ जाएगा. इस मुद्रा में कुछ देर तक बने रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें. इसके बाद धीरे-धीरे वापस शुरुआती स्थिति में आ जाएं. आसन पूरा करने के बाद कुछ समय शरीर को ढीला छोड़कर आराम करें.
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