जो ईश्वर के उपकार को भूल जाता है, वह कभी नहीं हो सकता सुखी: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आनंद किसी बाहरी वस्तु में नहीं है। वह तो आपके भीतर बैठा है। बाहर की वस्तु में आनंद ढूंढ़ोगे तो वेदना की भट्टी में गिरोगे। क्योंकि आप जिस वस्तु में आनंद मान रहे हो, वह एक दिन तो नष्ट होगी और उस दिन आपके शोक का पारावार नहीं रहेगा।
कस्तूरी रहती तो है मृग की नाभि में ही, फिर भी वह उसे बाहर ढूंढने के लिए वन-वन घूमता रहता है और दुःखी होता है। इसी तरह आनंद अंदर विराजमान है और प्राणी उसकी खोज में बाहर भटक रहा है। आज सुख देने वाले पदार्थ कल दुःखदाई सिद्ध होंगे। राजमहल में आनंद दिखाई देता है, परंतु पेट में पीड़ा उत्पन्न होने पर क्या वह आनंद प्रदान कर सकता है?
स्वादिष्ट भोजन में भी आनंद नहीं है, अन्यथा अजीर्ण के रोगी को वह भोजन दुःख रूप नहीं होता। इसीलिए संत कहते हैं, आनंद अंदर बैठा हुआ है। उसे ढूंढने के लिए अंदर की ओर झांको। जो ईश्वर के उपकार को भूल जाता है, वह कभी सुखी नहीं हो सकता। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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