Air Pollution: बढ़ता धुआं और धूल सांस के लिए खतरनाक, बच्चों-बुजुर्गों को खास सावधानी की जरूरत

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Air Pollution: हवा में बढ़ता धुआं, धूल और पार्टिकुलेट प्रदूषण केवल बाहर निकलने में परेशानी पैदा नहीं करता, बल्कि सांस से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ा सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या दूसरी सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है. ऐसे में रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों और थोड़ी सतर्कता के जरिए सांस की सेहत का ख्याल रखा जा सकता है.

आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि हवा में मौजूद धूल, धुआं और बारीक कण सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं. इससे कुछ लोगों में खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, सांस लेने में परेशानी और घरघराहट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

सूखे और जंगल की आग से भी बढ़ सकता है प्रदूषण

इसके अलावा, ईएनएसओ से जुड़ी सूखे की परिस्थितियां कुछ क्षेत्रों में जंगलों में आग और धूल भरी आंधियों का खतरा बढ़ा सकती हैं. ऐसे हालात में हवा में धुआं और पार्टिकुलेट प्रदूषण बढ़ने से सांस से जुड़ी समस्याएं और परेशान कर सकती हैं. इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा के बीच खास सावधानी बरतने की जरूरत है.

पानी पीते रहें, गले को रखें आराम

सांस और गले को आराम देने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. बहुत ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी या हर्बल इन्फ्यूजन लिया जा सकता है. इससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है और गले में होने वाले सूखेपन या खराश में कुछ राहत मिल सकती है.

हल्की सर्दी-जुकाम या खांसी की स्थिति में कुछ पारंपरिक घरेलू उपाय भी आजमाए जाते हैं. इनमें सूखी अदरक यानी सोंठ को गुड़ के साथ लेना, हल्दी वाला दूध या तुलसी के रस में शहद मिलाकर लेना शामिल है. हालांकि, ये उपाय लक्षणों में राहत के लिए हो सकते हैं, किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं हैं.

भाप और गरारे से मिल सकती है राहत

नाक बंद होने या गले में खराश जैसी परेशानी में भाप लेना कुछ लोगों को आराम दे सकता है. इसी तरह गुनगुने नमक या हल्दी वाले पानी से गरारे करने से भी गले की परेशानी में राहत मिल सकती है. भाप लेते समय बहुत गर्म पानी से जलने से बचना चाहिए. खासकर बच्चों के मामले में इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है.

योग और प्राणायाम भी हो सकते हैं मददगार

सांस और शरीर को सक्रिय रखने के लिए योग को भी अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. अपनी क्षमता के अनुसार भुजंगासन और गोमुखासन जैसे आसनों का अभ्यास किया जा सकता है. इनके साथ नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम भी किए जा सकते हैं.

गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर सांस लेने में ज्यादा परेशानी, लगातार खांसी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

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