Yoga Tips: अर्ध मत्स्येन्द्रासन से रीढ़ होगी मजबूत, पाचन रहेगा बेहतर, जानिए करने का सही तरीका

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Yoga Tips: योग केवल शरीर को फिट रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने की एक प्राचीन और प्रभावी पद्धति भी है. योग में ऐसे कई आसनों का वर्णन मिलता है, जो शरीर के अलग-अलग अंगों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इन्हीं में से एक है अर्ध मत्स्येन्द्रासन, जिसे रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने वाला महत्वपूर्ण आसन माना जाता है.

आयुष मंत्रालय ने बताए अर्ध मत्स्येन्द्रासन के फायदे

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्ध मत्स्येन्द्रासन हठ योग की प्रमुख क्रियाओं में शामिल है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से एड्रिनल ग्रंथि के कार्य में सुधार हो सकता है. इसके अलावा यह आसन कब्ज, दमा और पाचन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक माना जाता है. मंत्रालय के अनुसार, यह आसन अग्न्याशय (पेनक्रियाज) को सक्रिय करने में भी मदद करता है, इसलिए मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है. हालांकि किसी भी बीमारी में इसे अपनाने से पहले चिकित्सक या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.

मांसपेशियों को बनाता है मजबूत

अर्ध मत्स्येन्द्रासन का नियमित अभ्यास शरीर की मांसपेशियों को लचीला बनाने में मदद करता है. इसके साथ ही यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया को भी सहयोग देता है. इससे शरीर अधिक सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करता है.

ऐसे करें अर्ध मत्स्येन्द्रासन

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. इसके बाद दाएं पैर के घुटने को मोड़कर बाहर की ओर रखें और बाएं पैर का तलवा पूरी तरह जमीन पर टिकाएं. अब सिर को दाईं ओर घुमाते हुए कंधे की दिशा में देखें और सामान्य गति से गहरी सांस लेते रहें. करीब 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं. अभ्यास के दौरान ध्यान अपनी रीढ़ की हड्डी और सांस पर केंद्रित रखें. शुरुआत में अधिक जोर लगाने से बचें और समय के साथ अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाएं.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास हमेशा किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए, ताकि आसन सही तरीके से किया जा सके और किसी प्रकार की चोट का जोखिम न रहे. योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन का अभ्यास दोपहर के समय नहीं करना चाहिए. इसे सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है. तेज धूप या अत्यधिक गर्मी के दौरान योग करने से बचना चाहिए और यदि किसी को रीढ़, कमर या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए.

यह भी पढ़े: Sawan 2026: सावन में क्यों नहीं करना चाहिए दूध-दही और कढ़ी का सेवन, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक वजह

Latest News

पढ़ाई, कला और लीडरशिप का सुंदर तालमेल: दिल्ली से लंदन तक ऊर्जा अक्षरा की सफलता की कहानी

पश्चिम की आधुनिक शिक्षा और भारत की पारंपरिक संस्कृति का जो खूबसूरत रूप ऊर्जा अक्षरा के व्यक्तित्व में दिखता...

More Articles Like This

Exit mobile version