Bhujangasana Benefits: रोज करें भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और शरीर में बनी रहेगी ऊर्जा, जानें सही तरीका

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bhujangasana Benefits: योग को रोज की दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत और एकाग्र बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. योग के कई आसनों में भुजंगासन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह आसन खासतौर पर पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है. इसके अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ाने और ताजगी महसूस करने में भी मदद मिल सकती है. भुजंगासन को अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है. इसे करते समय शरीर का ऊपरी हिस्सा सांप के फन की तरह ऊपर उठता है, इसलिए इसका नाम भुजंगासन पड़ा. इसे सर्पासन के नाम से भी जाना जाता है. यह सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर आता है.

भुजंगासन करने से क्या फायदे मिलते हैं?

भुजंगासन का नियमित अभ्यास शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है. खासकर पीठ, रीढ़ और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों के लिए इसे उपयोगी माना जाता है.

रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद

भुजंगासन करते समय रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है. नियमित अभ्यास से पीठ की मांसपेशियों को मजबूत रखने और रीढ़ में लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

शरीर का लचीलापन बढ़ाने में सहायक

लंबे समय तक बैठे रहने या कम शारीरिक गतिविधि के कारण शरीर में अकड़न महसूस हो सकती है. भुजंगासन शरीर के ऊपरी हिस्से को अच्छा स्ट्रेच देता है, जिससे शरीर का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

तनाव कम करने में मददगार

योग का संबंध सिर्फ शारीरिक फिटनेस से नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति के लिए भी उपयोगी माना जाता है. भुजंगासन करते समय सांसों पर ध्यान देने से तनाव और मानसिक थकान को कम करने में मदद मिल सकती है.

कब्ज और पाचन में सहायक

भुजंगासन के दौरान पेट के हिस्से पर हल्का दबाव और खिंचाव पड़ता है. इसका अभ्यास पाचन तंत्र को सक्रिय रखने और कब्ज जैसी परेशानी में सहायक हो सकता है. हालांकि, किसी गंभीर पाचन समस्या में सिर्फ योग को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए.

शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है

सुबह के समय योग करने से शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है. भुजंगासन भी शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, जिससे अभ्यास के बाद शरीर में ताजगी और ऊर्जा महसूस हो सकती है.

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रखने में मदद

भुजंगासन सहित योग के नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. इससे शरीर को सक्रिय रखने के साथ त्वचा की सामान्य चमक बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है.

भुजंगासन कैसे किया जाता है?

भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले किसी समतल और साफ जगह पर योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं. दोनों पैरों को पीछे की ओर सीधा रखें और पैरों के पंजों को जमीन पर टिकाएं. अब दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें. कोहनियों को शरीर से सटाकर रखें. इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर, गर्दन और छाती को ऊपर की ओर उठाएं. इस दौरान नाभि के नीचे का हिस्सा जमीन से लगा रहना चाहिए. शरीर को उतना ही ऊपर उठाएं, जितना आसानी से उठा सकें. कंधों को ढीला रखें और गर्दन को जरूरत से ज्यादा पीछे की ओर न मोड़ें.

कुछ सेकंड इसी स्थिति में आराम से सांस लेते रहें. इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे छाती, गर्दन और सिर को वापस नीचे लाएं और शुरुआती स्थिति में आ जाएं. शुरुआत करने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार कुछ सेकंड से अभ्यास शुरू कर सकते हैं. अभ्यास के दौरान शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए. दर्द या असहजता महसूस होने पर तुरंत आसन रोक दें.

क्या भुजंगासन से पेट की चर्बी कम होती है?

भुजंगासन को पेट और शरीर के ऊपरी हिस्से के लिए किए जाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है. इसके अभ्यास से पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, लेकिन सिर्फ भुजंगासन करने से पेट की चर्बी कम होने की गारंटी नहीं है. वजन कम करने या शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद भी जरूरी होती है. भुजंगासन को इन सभी चीजों के साथ फिटनेस रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है.

किन लोगों को भुजंगासन नहीं करना चाहिए?

भुजंगासन करते समय अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है. पीठ में तेज दर्द, हाल में हुई सर्जरी या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले लोगों को यह आसन करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. मासिक धर्म के दौरान भी इस आसन को करने से पहले अपनी सुविधा और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए. अगर आसन करते समय दर्द, खिंचाव या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो जबरदस्ती अभ्यास नहीं करना चाहिए. भुजंगासन को सही तकनीक और अपनी क्षमता के अनुसार करने पर इसे रोज की योग दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. नियमित योग के साथ संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली अपनाने से शरीर और मन को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.

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