शरीर की जकड़न दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार है ये योगासन, जानें करने का सही तरीका और फायदे

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Parivrtta Baddha Parsvakonasana: दिनभर बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं. ऐसे में योग शरीर को सक्रिय रखने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने का एक उपयोगी माध्यम हो सकता है. योग के कठिन आसनों में शामिल परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन शरीर को घुमाने, पैरों को मजबूत करने और संतुलन साधने का अभ्यास है. इसमें शरीर के निचले हिस्से को स्थिर रखते हुए धड़ को एक तरफ घुमाया जाता है और हाथों को पीछे से बांधने की कोशिश की जाती है. हालांकि, इस आसन को करने के लिए लचीलेपन के साथ सही तकनीक और सावधानी भी जरूरी है.

क्या है परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन?

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन को अंग्रेजी में Revolved Bound Side Angle Pose कहा जाता है. इसका नाम संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है. परिवृत्त का अर्थ घूमना, बद्ध का अर्थ बंधा हुआ और पार्श्वकोण का अर्थ बगल का कोण होता है. इस आसन में पैरों को अलग रखकर एक घुटने को मोड़ा जाता है, धड़ को उसी दिशा में घुमाया जाता है और हाथों को शरीर के पीछे बांधने का प्रयास किया जाता है.

यह पार्श्वकोणासन का अधिक चुनौतीपूर्ण रूप है, जिसमें संतुलन, रीढ़ की गतिशीलता और कंधों के लचीलेपन की जरूरत होती है. शुरुआती लोगों को पहले सामान्य पार्श्वकोणासन और परिवृत्त पार्श्वकोणासन का अभ्यास करना चाहिए. शरीर में पर्याप्त लचीलापन आने के बाद ही हाथों को बांधने वाले रूप की कोशिश करनी चाहिए.

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन करने का सही तरीका

इस आसन को सही तकनीक से करना जरूरी है. शुरुआत में इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना बेहतर रहता है.

स्टेप 1: सीधे खड़े होकर शुरुआत करें.

सबसे पहले योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं. दोनों पैरों के बीच पर्याप्त दूरी रखें और रीढ़ को सीधा रखें. शरीर को स्थिर करते हुए कुछ सामान्य सांसें लें.

स्टेप 2: एक पैर आगे रखें.

दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे ले जाएं. दोनों पैरों के बीच इतनी दूरी रखें कि आप आसानी से संतुलन बना सकें. पीछे वाले पैर को स्थिर रखें और शरीर का वजन दोनों पैरों पर संतुलित करने की कोशिश करें.

स्टेप 3: आगे वाले घुटने को मोड़ें.

दाएं घुटने को मोड़ें और उसे टखने के लगभग ऊपर रखने का प्रयास करें. पीछे वाला पैर सीधा और मजबूत रखें. घुटने पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें.

स्टेप 4: धड़ को घुमाएं.

सांस छोड़ते हुए धड़ को दाईं ओर घुमाएं. रीढ़ को लंबा रखते हुए छाती को खोलने की कोशिश करें. शरीर को जबरदस्ती घुमाने या कमर पर अतिरिक्त दबाव डालने से बचें.

स्टेप 5: हाथों को बांधने का प्रयास करें.

पहले सामान्य परिवृत्त पार्श्वकोणासन में संतुलन बनाएं. इसके बाद ही हाथों को पीछे से बांधने की कोशिश करें. यदि हाथ आपस में नहीं मिलते, तो स्ट्रैप या योग बेल्ट की सहायता लें. हाथों को जबरदस्ती खींचकर बांधना जरूरी नहीं है.

स्टेप 6: कुछ सांसों तक स्थिति बनाए रखें.

अपनी क्षमता के अनुसार कुछ सामान्य सांसों तक आसन में रहें. सांस रोकने के बजाय सहज रूप से सांस लेते रहें. इसके बाद धीरे-धीरे आसन से बाहर आएं और दूसरी तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं.

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन के संभावित फायदे

1. रीढ़ की गतिशीलता बढ़ाने में मदद

इस आसन में धड़ को नियंत्रित तरीके से घुमाया जाता है. नियमित और सही अभ्यास से रीढ़ की घूर्णन क्षमता और आसपास की मांसपेशियों की गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, यह पीठ या कमर के दर्द का इलाज नहीं है.

2. पैरों और जांघों को मजबूत करने में सहायक

आसन के दौरान आगे वाले पैर, जांघों और कूल्हों की मांसपेशियों को सक्रिय रहना पड़ता है. पीछे वाला पैर भी शरीर को स्थिर रखने में मदद करता है. इससे निचले शरीर की ताकत और संतुलन के अभ्यास को बढ़ावा मिल सकता है.

3. संतुलन और एकाग्रता का अभ्यास

इस आसन में पैरों की स्थिति, धड़ का घुमाव और हाथों का बंध एक साथ साधना पड़ता है. इससे शरीर की स्थिति के प्रति जागरूकता, संतुलन और सांस पर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास होता है.

4. छाती और कंधों में लचीलापन

हाथों को पीछे बांधने की स्थिति कंधों और छाती के आसपास खिंचाव पैदा कर सकती है. हालांकि, इस हिस्से में पर्याप्त लचीलापन न होने पर हाथों को बांधने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

5. शरीर की सक्रियता बनाए रखने में मदद

योग के इस आसन में कई मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं. नियमित अभ्यास से शारीरिक गतिविधि, गतिशीलता और शरीर पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

क्या यह आसन पाचन और मेटाबॉलिज्म के लिए फायदेमंद है?

इस आसन में धड़ के घुमाव के कारण पेट के आसपास खिंचाव और दबाव महसूस हो सकता है. योगाभ्यास कुछ लोगों को आराम और शारीरिक सक्रियता का अनुभव दे सकता है, लेकिन यह दावा करना सही नहीं होगा कि इस आसन से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, कब्ज या ब्लोटिंग निश्चित रूप से दूर हो जाती है अथवा मेटाबॉलिज्म तेजी से बढ़ता है. शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में लिवर, किडनी और पाचन तंत्र की प्राकृतिक प्रक्रियाएं मुख्य भूमिका निभाती हैं. कब्ज या लगातार पेट फूलने की समस्या होने पर केवल योगासन पर निर्भर रहने के बजाय उचित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

किन लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए?

परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है. निम्नलिखित स्थितियों में विशेष सावधानी जरूरी है.

  • घुटनों, कंधों, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में हालिया चोट होने पर इसका अभ्यास न करें.
  • कमर या गर्दन में गंभीर दर्द होने पर बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन न करें.
  • संतुलन बनाने में परेशानी होने पर दीवार या योग ब्लॉक की मदद लें और प्रशिक्षक की निगरानी में अभ्यास करें.
  • गर्भावस्था में गहरे ट्विस्ट और पेट पर दबाव डालने वाली स्थिति से बचें. अभ्यास से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें.
  • आसन करते समय दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो तो तुरंत सामान्य स्थिति में लौट आएं.

अभ्यास करते समय इन बातों का रखें ध्यान

शुरुआत में शरीर को पूरी तरह घुमाने या हाथों को बांधने का लक्ष्य न रखें. पहले पैरों की सही स्थिति, घुटने का संतुलन और रीढ़ को लंबा रखने पर ध्यान दें. सांस को सहज रखें और शरीर की क्षमता से अधिक खिंचाव न दें. जरूरत पड़ने पर योग ब्लॉक या बेल्ट का इस्तेमाल करें. परिवृत्त बद्ध पार्श्वकोणासन एक चुनौतीपूर्ण योग मुद्रा है. इसे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करने से संतुलन, लचीलेपन और शरीर पर नियंत्रण के अभ्यास में मदद मिल सकती है.

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