भारत के ऑफिस रियल एस्टेट बाजार में GCC के चलते बढ़ेगी मांग, योगदान 50% तक पहुंचने की उम्मीद

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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देश के सात प्रमुख शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की हिस्सेदारी भारतीय ऑफिस रियल एस्टेट की कुल मांग में करीब 50% तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें अमेरिकी कंपनियों की मांग सबसे ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है. गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई. कोलियर्स इंडिया के अनुसार, वर्ष 2020 से अब तक भारत में जीसीसी से जुड़ी लीजिंग गतिविधियों में अमेरिकी कंपनियों का हिस्सा लगभग 70% रहा है, जबकि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की कंपनियों की भागीदारी 8 से 10% के बीच दर्ज की गई है.

ग्रेड A ऑफिस स्पेस की मांग में तेज उछाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ वर्षों में जीसीसी देशों द्वारा ग्रेड A ऑफिस स्पेस की वार्षिक मांग 35–40 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकती है, जो कुल ऑफिस स्पेस की मांग का 40–50% होगी. कोलियर्स इंडिया के ऑफिस सर्विसेज के प्रबंध निदेशक अर्पित मेहरोत्रा ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों से टेक-केंद्रित जीसीसी की मांग स्थिर रह सकती है, लेकिन यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की कंपनियों से — खासकर इंजीनियरिंग और विनिर्माण, बीएफएसआई और परामर्श क्षेत्रों में — मांग बढ़ने की उम्मीद है.

व्यापार समझौतों से बढ़ेगी दीर्घकालिक मांग

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ चल रहे व्यापार समझौतों और शुल्क युक्तिकरण से टेक्नोलॉजी, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, इंजीनियरिंग व विनिर्माण तथा परामर्श क्षेत्रों में लंबे समय तक ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ सकती है. 2020 से देश में कुल 310 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की मांग में से लगभग 117 मिलियन वर्ग फुट यानी 38% हिस्सा जीसीसी का रहा है. यह वृद्धि इस बात से भी स्पष्ट है कि 2020 में मांग करीब 16 मिलियन वर्ग फुट थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 30 मिलियन वर्ग फुट हो गई.

GCC से मिलेगा बाजार को दीर्घकालिक सहारा

कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा कि जीसीसी भारत में ऑफिस स्पेस की मांग को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे और इससे किराएदारों के आधार में लगातार हो रही बढ़ोतरी और विविधता को मजबूती मिलेगी. उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक व्यापारिक तनाव में कमी और भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ हालिया द्विपक्षीय समझौतों से देश के ऑफिस बाजार की मांग को और गति मिलने की संभावना है. रियल एस्टेट सेवा फर्म के अनुसार, कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता और लागत का तुलनात्मक लाभ भी भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के विस्तार को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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