MSME ZED Scheme: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को गुणवत्ता और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करने वाली केंद्र सरकार की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) सर्टिफिकेशन योजना को लगातार अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख MSME पंजीकृत हो चुके हैं. सरकार महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के स्वामित्व वाले MSME को ZED सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है.
913 करोड़ रुपये से ज्यादा की दी गई वित्तीय सहायता
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के बयान के अनुसार, ZED योजना के तहत उद्योगों को गुणवत्ता आधारित और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने के लिए अब तक 913 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है. इस योजना का उद्देश्य MSME को बेहतर उत्पादन प्रणाली अपनाने, गुणवत्ता मानकों में सुधार करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है.
क्या है ZED योजना का उद्देश्य?
MSME मंत्रालय के अनुसार, जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) पहल का मकसद उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए प्रेरित करना है. इसके जरिए उद्यमों को तकनीक, सिस्टम और उत्पादन प्रक्रियाओं में लगातार सुधार करने में मदद मिलती है, जिससे भारतीय MSME घरेलू और वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत कर सकते हैं.
कितने उद्योगों को मिला सर्टिफिकेशन?
योजना के तहत पंजीकृत उद्यमों में से 6.67 लाख MSME को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन दिया जा चुका है. मंत्रालय के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में छोटे उद्योग गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
राज्यों और वित्तीय संस्थानों का भी मिल रहा सहयोग
सरकारी बयान में कहा गया है कि ZED योजना का प्रभाव सिर्फ सर्टिफिकेशन तक सीमित नहीं है. देश के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इसे अपनी औद्योगिक नीतियों का हिस्सा बनाया है और ZED प्रमाणित MSME को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. इसके साथ ही 19 वित्तीय संस्थान ZED प्रमाणित उद्यमों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उन्हें आसानी से वित्तीय सहायता मिल सके.
महिला उद्यमियों को मिल रही 100% सब्सिडी
मंत्रालय ने कहा कि महिला उद्यमियों के लिए दी जा रही 100 प्रतिशत सब्सिडी सर्टिफिकेशन की पूरी लागत को खत्म कर देती है. इससे अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को इस योजना से जुड़ने और अपने कारोबार को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित करने का अवसर मिल रहा है.
योजना के तहत मिलती है कई तरह की वित्तीय सहायता
MSME मंत्रालय के अनुसार, ZED योजना उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए प्रेरित करती है. इसके तहत तकनीक, प्रबंधन प्रणाली और विनिर्माण प्रक्रियाओं में लगातार सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे गुणवत्ता, उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा मिलता है. योजना के अंतर्गत पात्र MSME को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता भी दी जाती है. इसमें परीक्षण, सिस्टम या उत्पाद सर्टिफिकेशन की लागत का 75 प्रतिशत तक (अधिकतम 50,000 रुपये) सहायता के रूप में दिया जाता है. वहीं, परामर्श और हैंडहोल्डिंग सहायता के लिए 2 लाख रुपये तक तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों, स्वच्छ तकनीकों और जीरो इफेक्ट समाधान अपनाने के लिए 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है.

