Health Tips: देर रात तक मोबाइल चलाना, काम करना या जागते रहना और फिर सुबह देर से उठना आज की बदलती लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है. कई लोगों को लगता है कि जब नींद पूरी हो रही है तो सुबह उठने का समय मायने नहीं रखता. लेकिन आयुर्वेदिक परंपरा दिन की शुरुआत के समय को भी महत्वपूर्ण मानती है. आयुर्वेद में ‘ब्रह्ममुहूर्ते उत्तिष्ठेत्’, यानी ब्रह्म मुहूर्त में उठने की बात कही गई है.
माना जाता है कि सुबह का यह शांत समय शरीर और मन को दिन की बेहतर शुरुआत के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है. आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ब्रह्म मुहूर्त से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसे आमतौर पर सूर्योदय से करीब दो घंटे पहले का समय माना जाता है. इस दौरान वातावरण अपेक्षाकृत शांत रहता है और सुबह की शुरुआत ध्यान, योग, प्राणायाम और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों से करने के लिए इसे अनुकूल माना जाता है.
क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त?
आयुर्वेदिक परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का एक विशेष समय माना गया है. सामान्य तौर पर इसे सूर्योदय से लगभग दो घंटे पहले का समय बताया जाता है. इस दौरान आसपास का वातावरण शांत होता है और रात की नींद के बाद व्यक्ति दिन की शुरुआत के लिए खुद को तैयार कर सकता है. सुबह के इस समय को ध्यान, योग, प्राणायाम, अध्ययन या कुछ समय शांत बैठकर आत्मचिंतन करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. हालांकि, इसका लाभ तभी मिल सकता है जब रात में पर्याप्त और अच्छी नींद ली गई हो.
सुबह जल्दी उठने से मन रह सकता है शांत
आयुर्वेद के अनुसार, नियमित रूप से सुबह जल्दी उठने की आदत व्यक्ति को दिन की शुरुआत अधिक सजग और व्यवस्थित तरीके से करने में मदद कर सकती है. सुबह का समय अपेक्षाकृत शांत होने के कारण व्यक्ति बिना किसी जल्दबाजी के अपने जरूरी कामों की योजना बना सकता है. दिन की शुरुआत में कुछ समय खुद के लिए निकालने से मानसिक रूप से तैयार होने और सकारात्मक सोच बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है.
सुबह का समय योग और प्राणायाम के लिए बेहतर
सुबह उठने के बाद हल्की शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. ताजी हवा में टहलना, हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम शरीर को सक्रिय करने में मदद कर सकता है. अगर सुबह का समय शांत वातावरण में योग या ध्यान के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो व्यक्ति दिन की शुरुआत अधिक व्यवस्थित तरीके से कर सकता है. हालांकि, किसी भी व्यायाम को अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए.
सिर्फ जल्दी उठना ही काफी नहीं
यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है कि स्वस्थ दिनचर्या का मतलब सिर्फ सुबह जल्दी उठ जाना नहीं है. अगर कोई व्यक्ति रात में देर तक जागता है और पर्याप्त नींद लिए बिना सुबह जल्दी उठने की कोशिश करता है, तो इससे थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है. इसलिए सुबह जल्दी उठने की आदत बनाने के साथ रात में समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है. नींद पूरी होने के बाद ही सुबह जल्दी उठने की दिनचर्या शरीर के लिए ज्यादा सहज हो सकती है.
अपनी सेहत के हिसाब से बदलें दिनचर्या
हर व्यक्ति की नींद, स्वास्थ्य और दैनिक दिनचर्या एक जैसी नहीं होती. इसलिए अचानक अपनी दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे सोने और जागने का समय बदलना बेहतर हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति को पहले से बीमारी, कमजोरी, नींद से जुड़ी परेशानी या अपच जैसी समस्या है, तो अपनी दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.
ध्यान रखें: ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परंपरा आयुर्वेद में महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन स्वस्थ दिनचर्या के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हैं. केवल जल्दी उठने को ही अच्छी सेहत की गारंटी नहीं माना जा सकता.
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